हे भगवान!
मैं अपनी जड़ों, अपने मूल स्वरूप की खोज में हूँ। दृश्य और उससे जुड़ी दुनिया में खोकर, मैं इंद्रिय-संबंधी विषयों की इच्छाओं में बह गया। मैं आनंद, शांति और सुरक्षा की तलाश में दुनिया में भटकता रहा। अब मैं 'मैं कौन हूँ?' की खोज में हूँ।
अपने सच्चे स्वरूप को जानने की मेरी प्यास ही मेरी आध्यात्मिक भलाई की शुरुआत है, एकमात्र आशा है। और यह प्यास आपके बिना नहीं बुझ सकती। कृपया मुझे अपनी दिव्य कृपा से भर दें। कृपया इस लालसा और प्राप्ति के बीच, प्रतीक्षा और मिलन के बीच की खाई को अपनी कृपा से भर दें।
हे प्रभु! मुझे यह अहसास हो गया है कि मैं न तो कुछ जानता हूँ और न ही कुछ समझ सकता हूँ। मैं अपना सब कुछ, अपना ज्ञान और अपना अज्ञान, आपको समर्पित करता हूँ। मैं आपके पास एक खाली कागज की तरह आया हूँ। आप इस पर जो चाहें लिख दें।
हे प्रभु, आपकी इच्छा ही मेरी इच्छा हो। मैं सदा आपके निर्देशों का पालन करूँ। मैं अपने सच्चे स्वरूप को जानने के लिए हमेशा सतर्क रहूँ। मैं अत्यंत धैर्य से ध्यान का अभ्यास करूँ। मैं अपने भीतर की गहराई में पूर्णतया लीन हो जाऊँ। आपका अनुभव ही मेरा अनुभव हो।
ओम शांति शांति शांति










