धर्म को केवल आपकी जीभ ही नहीं बल्कि आपके पूरे अस्तित्व को छूना चाहिए।
![]()
धर्म ही साधक का सच्चा धन है।
![]()
धर्म, जल के समान, आपके अशुद्धियों को धो देता है। इसे स्वच्छ रखें।
![]()
धर्म वैज्ञानिक है। प्रयोग करने के बाद ही इस पर विश्वास करें।
![]()
“धर्म प्रेम की पराकाष्ठा है।”
यह प्रेम के फूल की सुगंध के समान है।









