
मइरे कहां है?
मनुष्य गतिविधियों से थक जाता है, पर अपनी कमियों से नहीं। वह संसार को दलदल समझता है, पर अपनी स्वयं की कमियों पर ध्यान नहीं देता। पूज्य गुरुदेवश्री समझाते हैं कि इस दलदल को सही ढंग से समझकर, दोष की जड़ तक जाओ और उसे दूर करो। प्रार्थना करो, “मैं संसार के दलदल में फंसा हुआ हूँ, केवल आप ही मुझे इससे बाहर निकाल सकते हैं।”























